39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला- 2026, सूरजकुंड मेला बना कला और संस्कृति का महाकुंभ

39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला- 2026

चंडीगढ़, 9 फरवरी— फरीदाबाद में 39वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले में वैश्विक कला और भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। शिल्प मेले के इस वर्ष मिस्र को पार्टनर कंट्री के रूप में चुना गया है, जबकि उत्तर प्रदेश और मेघालय पार्टनर स्टेट की भूमिका निभा रहे हैं। मेला परिसर में विशेष पवेलियन बनाए गए हैं, जो उत्तर प्रदेश और मेघालय की पारंपरिक स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत नजारा पेश कर रहे हैं।

मेला परिसर में स्थापित इन पवेलियनों के माध्यम से न केवल हस्तशिल्प को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि अलग-अलग देशों और राज्यों के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक सेतु भी तैयार हो रहा है। पर्यटक यहाँ आकर न केवल खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि लाइव डेमो के माध्यम से इन कठिन कलाकृतियों को बनते हुए भी देख रहे हैं।

मेले में शिल्पकारों की बारीकी का बेहतरीन नमूना स्टॉल नंबर 124 पर देखने को मिल रहा है। यहाँ मार्बल के माध्यम से तैयार किए गए उत्पाद पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहे हैं। स्टॉल पर मार्बल से बने कप, प्लेट, टी-सेट और विशेष साइड टेबल के साथ शतरंज, पत्थरों पर उकेरी गई शानदार पेंटिंग्स उपलब्ध है जो कला प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

शिल्पकार इरफान अली ने बताया कि उनके परिवार की यह पुश्तैनी कला है, जिसे वे आधुनिक पसंद के अनुसार ढाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि सूरजकुंड जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनके उत्पादों को न केवल सराहना मिल रही है, बल्कि अच्छी बिक्री से शिल्पकारों का उत्साह भी बढ़ा है।

By Balwinder Singh

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