चंडीगढ़ — चौपाल ओटीटी पर 14 अगस्त को हो रही रिलीज़ हुई पंजाबी वेब सीरीज “84 तो बाद” 1984 के विरोधी सिख दंगों के बाद पंजाब में फैले भय, सियासी दबाव और न्याय की लड़ाई को केंद्र में रखकर बनी है। लेखक जरनैल सिंह की कलम और निर्देशक गुरअमानत सिंह पतंगा के विज़न में तैयार यह पीरियड थ्रिलर न केवल एक क्राइम ड्रामा है, बल्कि उस दौर का समाजिक दस्तावेज़ भी है।
कहानी का केंद्र है बगराह सिंह (कुलजिंदर सिद्धू) — एक ऐसा नाम, जिसकी दहशत आज भी लोगों के ज़ेहन में जिंदा है। उसका अतीत सत्ता, डर और कई अनकही घटनाओं से जुड़ा है। कहानी में मोड़ तब आता है जब एडवोकेट अमनदीप कौर (डॉ. दृष्टि तलवार) पुराने ज़ख्म कुरेदती हैं और सच सामने लाने का बीड़ा उठाती हैं।
सीरीज में लेखक जरनैल सिंह खुद प्रोफेसर शामशेर सिंह का किरदार निभा रहे हैं — एक संवेदनशील और विवेकशील व्यक्ति, जो न्याय और सच्चाई की लड़ाई में अहम भूमिका निभाता है। उनके साथ गुरशबद, सत्यजित, महबूब ईशर, संदीप शर्मा जैसे कलाकार कहानी को मजबूती देते हैं।
“84 तो बाद” सिर्फ अपराध और रहस्य की परतें नहीं खोलती, बल्कि उस दौर के सामाजिक-राजनीतिक माहौल, आम लोगों की पीड़ा और सत्ता बनाम सच की लड़ाई को पर्दे पर जीवंत करती है। यह सीरीज इतिहास की उस काली सच्चाई को उजागर करती है, जिसे समय की धूल ने ढक दिया था।
