सूरजकुंड मेले में दिखा दक्षिण भारत की चित्रकला का वैभव

चण्डीगढ़, 5 फरवरी — फरीदाबाद की सुरम्य अरावली पहाड़ियों में आयोजित 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला कला प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। मेले में देश-विदेश की विविध संस्कृतियों के बीच दक्षिण भारत की पारंपरिक चित्रकला अपनी अमिट छाप छोड़ रही है। तमिलनाडु से आए शिल्पकार केशव की तंजौर पेंटिंग पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

शिल्पकार केशव के स्टॉल पर 12 हजार रुपए से लेकर 12 लाख रुपए तक की बेशकीमती पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं। तिरुपति बालाजी की 12 लाख रुपए की कीमत वाली पेंटिंग अपनी सूक्ष्म कारीगरी, शुद्ध सोने की पन्नी के काम और कीमती रत्नों के जुड़ाव के कारण मेले की सबसे महंगी और भव्य कलाकृतियों में से एक है, जो मेले में आकर्षण का केंद्र बनी है।

बीन, नगाड़ा, कच्ची घोड़ी पार्टी व लंबू कर रहे आगंतुकों का जोरदार स्वागत

युवक युवतियां ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटक भी जमकर झूमते आए नजर

15 फरवरी तक चलने वाले सूरजकुंड मेले में रोजाना हजारों पर्यटक पहुंच रहे हैं। लोकल टू ग्लोबल-आत्मनिर्भर भारत की पहचान थीम के साथ आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर क्राफ्ट मेले में स्वदेशी, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

मेले में हरियाणा के साथ अन्य प्रदेशों के कलाकार भी अपनी लोक शैली से पर्यटकों का मनोरंजन कर रहे हैं। मेले में लोक कलाकारों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में परंपरागत वाद्य यंत्र बजाकर दर्शकों का स्वागत किया जा रहा है। इन कलाकारों के वाद्य यंत्रों की ध्वनि इतनी सुरीली है कि पर्यटक खुद को थिरकने से नहीं रोक पा रहे हैं। मेले में डेरु, बैगपाइपर व ढोल की थाप पर युवक युवतियां ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटक भी जमकर झूमते नजर आ रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर क्राफ्ट मेले को लेकर युवा पीढ़ी में जोश है। मेला परिसर में जगह-जगह पारंपरिक वेशभूषा से सुसज्जित ऐसी सांस्कृतिक टोलियां लोगों का खूब मनोरंजन कर रही हैं। मेला परिसर में स्वदेशी उत्पादों की सुगंध, लोक संगीत की गूंज और प्राचीन संस्कृति की झलक आगंतुकों को आकर्षित कर रही है, वहीं इस मेले में हरियाणा की लोक संस्कृति से बीन, नगाड़ा पार्टी कलाकार पर्यटकों का जोरदार स्वागत कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय पवेलियन में मिस्र की शीशल कला का अद्भुत प्रदर्शन

शीशल से बने उत्पादों ने मोहा पर्यटकों का मन

अरावली की सुंदर वादियों में आयोजित इस मेले में इस वर्ष पार्टनर नेशन के रूप में मिस्र अपनी अद्भुत कलाकृतियों के साथ मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां मेला परिसर में पार्टनर नेशन मिस्र अपनी संस्कृति को प्रदर्शित करते हुए पर्यटकों पर अमिट छाप छोड़ रहा है। वहीं अंतरराष्ट्रीय पवेलियन में मिस्र के शिल्पकारों द्वारा प्रदर्शित हस्तशिल्प न केवल विदेशी संस्कृति की झलक दिखा रहे हैं, जो भारतीय पर्यटकों के बीच भी बेहद लोकप्रिय हो रहे हैं।

मिस्र के स्टॉल पर शीशल से बने उत्पाद सबसे अधिक चर्चा बटोर रहे हैं। यहां विशेष रूप से तैयार किए गए ज्वेलरी बॉक्स पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं। इसके अतिरिक्त, शीशल से निर्मित बर्नर जो घर में खुशबू फैलाने के काम आते हैं, फूड टोकरी, तथा हाथ और गले के लिए आकर्षक ब्रेसलेट्स और नेकलेस उपलब्ध है। इसके साथ ही स्टॉल पर सिरेमिक से बने सुंदर टी-सेट और बाउल भी सजाए गए हैं, जो अपनी महीन कारीगरी के लिए सराहे जा रहे हैं।

मिस्र के शिल्पकार गोहारी ने बताया कि वे अपने इस पुश्तैनी काम को कई पीढिय़ों से संजोए हुए हैं। उन्होंने बताया कि वे मिस्र के मिनिस्ट्री ऑफ सोशल सॉलिडेरिटी और भारत सरकार के विशेष सहयोग से इस मेले में अपनी स्टॉल लगा पाए हैं। उन्होंने मेले की शानदार व्यवस्थाओं और आतिथ्य सत्कार के लिए हरियाणा सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड का यह मंच विश्व भर के शिल्पकारों को एक साथ अपनी कला की प्रतिभा दिखाने का बेहतरीन जरिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कला का आदान-प्रदान होता है।

कश्मीर की पेपरमेशी कला के मुरीद हुए लोग

अखरोट की लकड़ी से बनाए खिलौने व लैंप आ रहे पसंद

सूरजकुंड मेले में कश्मीर की पेपरमेशी कला को देखकर पर्यटक शिल्पकारों के मुरीद हो रहे हैं। यह कश्मीर की 15वीं शताब्दी की पारंपरिक कला है जिसमें कागज की लुगदी, कपड़े व भूसे को सांचे में मिलाकर बक्से, गुलदस्ते व अन्य वस्तुएं बनाई जाती हैं और जटिल पेंटिंग से तैयार किया जाता है।

गुलाम मोही-उद-दीन डार ने बताया कि कश्मीरी पेपर मैशी प्राचीन शिल्पकला को देशभर में काफी पसंद किया जाता है। सूरजकुंड मेला में भी उनके द्वारा तैयार किए फ्रेम, लैंप सहित अन्य सजावटी सामान पर्यटकों को पसंद आ रहे हैं। इसके अलावा, अखरोट की लकड़ी से बच्चों के खिलौने भी काफी पसंद किए जा रहे हैं।

By Balwinder Singh

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