नई दिल्ली (गुरप्रीत सिंह): इस हफ्ते घरेलू शेयर बाजार में हिचकोले लेते रहने के आसार हैं। निवेशक आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी फैसले, ग्लोबल इकोनॉमिक डेटा और मिडिल ईस्ट के तनावपूर्ण हालात पर टकटकी लगाए बैठे हैं। बाजार जानकारों ने ऐसी भविष्यवाणी की है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड ऑयल प्राइस और FII फ्लो भी मार्केट की चाल को मोड़ने में बड़ा रोल अदा करेंगे।
बताया जा रहा है कि अभी देश में RBI की MPC मीटिंग सबसे बड़ा इवेंट है। ट्रेडर्स इन्फ्लेशन और GDP ग्रोथ पर बैंक के स्टैंड को बारीकी से परखेंगे।
इतना ही नहीं यह भी कहा जा रहा है कि रेपो रेट में अभी कोई कटौती या बढ़ोतरी नहीं दिख रही, लेकिन ऊंचे ऑयल रेट्स से इन्फ्लेशन का बोझ कायम है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी सुस्ती के संकेत हैं। इसलिए बैंक के कमेंट्स और फ्यूचर प्रोजेक्शन पर सबकी नजर टिकी होगी।
मिडिल ईस्ट की जियो-पॉलिटिकल हलचल को नायर ने मार्केट सेंटिमेंट का अहम् हिस्सा बताया।
पिछले हफ्ते सेंसेक्स 263.67 पॉइंट्स या 0.35% लुढ़का, तो निफ्टी 106.5 पॉइंट्स या 0.46% नीचे बंद हुआ।
एक्सपर्ट्स को लगता है, अगर मिडिल ईस्ट में तनाव ढीला पड़ा और क्रूड सस्ता हुआ, तो मार्केट को ब्रिदिंग स्पेस मिलेगा। लेकिन इंटेंसिफिकेशन पर रिस्क एपेटाइट घटेगी और FII आउटफ्लो का खतरा मंडराएगा।
