एचसीएस अधिकारियों की एपीआर अब ऑनलाइन दर्ज होगी

चंडीगढ़, 12 मार्च- हरियाणा सरकार ने सभी विभागों को हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) के अधिकारियों की वर्ष 2025–26 की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (पीएआर) राज्य के इंट्रानेट पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी द्वारा इस संबंध में जारी एक पत्र के अनुसार एचसीएस अधिकारियों की पीएआर वेबसाइट http://intrahry.gov.in पर ऑनलाइन दर्ज की जाएगी और इसे 31 दिसंबर, 2026 तक अंतिम रूप देना अनिवार्य होगा।

सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों तथा बोर्डों और निगमों के प्रमुखों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

पत्र के अनुसार, अधिकारी एचआरएमएस पोर्टल पर उपलब्ध अपने पेयी कोड और पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से पोर्टल पर लॉगिन कर सकेंगे। सत्यापन के लिए पंजीकृत मोबाइल नंबर पर वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) भेजा जाएगा। इसके अतिरिक्त डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) अथवा स्कैन किए गए हस्ताक्षर अपलोड कर भी प्रमाणीकरण किया जा सकेगा।

अधिकारियों को 31 मई तक अपना स्व-मूल्यांकन प्रस्तुत करना होगा। रिपोर्टिंग प्राधिकारी को 31 जुलाई तक मूल्यांकन पूरा करना होगा। रिव्यूइंग प्राधिकारी को 30 सितंबर तक समीक्षा करनी होगी, जबकि स्वीकार करने वाले प्राधिकारी द्वारा 31 दिसंबर, 2026 तक रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।

40 वर्ष से अधिक आयु के एचसीएस अधिकारियों के लिए स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है और स्व-मूल्यांकन के साथ मेडिकल रिपोर्ट का सारांश भी अपलोड करना होगा।

पत्र के अनुसार कार्य निष्पादन का मूल्यांकन 1 से 10 के पैमाने पर संख्यात्मक ग्रेडिंग प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इसमें कार्य निष्पादन, व्यक्तिगत गुणों तथा कार्यात्मक दक्षताओं को शामिल किया जाएगा।

ऑनलाइन प्रणाली में यह व्यवस्था भी की गई है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर संबंधित प्राधिकारी द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है तो रिपोर्ट स्वतः अगले स्तर पर अग्रेषित हो जाएगी, ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।

क्रमांक -2026

प्रदेश में 100 स्वास्थ्य संस्थान बने फर्स्ट रेफरल यूनिट : आरती सिंह राव

-एफआरयू के सुदृढ़ होने से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध होगा

  • पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार होगा।

चंडीगढ़, 12 मार्च – हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि राज्य सरकार ने नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत प्रदेश में द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 100 स्वास्थ्य संस्थानों को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) के रूप में नामित किया है। इस पहल का उद्देश्य विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि गंभीर मामलों में मरीजों को त्वरित उपचार मिल सके।

उन्होंने बताया कि इन एफआरयू को 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं प्रदान करने के लिए विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों पर प्रसूति सेवाएं, नवजात शिशु देखभाल तथा रक्त भंडारण जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे माताओं और नवजात शिशुओं से जुड़ी आपात स्थितियों में तुरंत और प्रभावी चिकित्सा सहायता मिल सकेगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ये फर्स्ट रेफरल यूनिट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और तृतीयक अस्पतालों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करेंगी। सरकार द्वारा इन केंद्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, विशेषज्ञ चिकित्सा स्टाफ की तैनाती करने और रेफरल व्यवस्था को तेज व प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि इस पहल के माध्यम से राज्य सरकार का लक्ष्य हरियाणा में मातृ और नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाना है। इन एफआरयू के सुदृढ़ होने से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध होगा, जिससे पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार होगा।

प्रदेश में जिन 100 स्वास्थ्य संस्थानों को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) के रूप में नामित किया है उनमें अंबाला जिला के 5 संस्थान हैं। इनके अलावा, भिवानी के 4, चरखी दादरी के 2, फरीदाबाद के 5, फतेहाबाद के भी 5, गुरुग्राम के 4, हिसार के 5, झज्जर के 6, जींद के 6, कैथल के 4, करनाल के 6, कुरुक्षेत्र के 5, महेंद्रगढ़ के 4, नूंह के 5, पलवल के 4, पंचकूला के 4, पानीपत के 4, रेवाड़ी के 4, रोहतक के 4, सिरसा के 5, सोनीपत के 5 तथा यमुनानगर जिला के 4 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को एफआरयू के तौर पर नामित किया गया है।

By Gurpreet Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *