भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौता हस्ताक्षरित, बाजार पहुंच व निवेश प्रवाह बढ़ाने को

नई दिल्ली (राजीव शर्मा): भारत व न्यूजीलैंड ने सोमवार को व्यापक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) औपचारिक रूप दिया, जो आर्थिक संबंधों को मजबूत करने व द्विपक्षीय वाणिज्य को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

समझौते पर केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल व न्यूजीलैंड के व्यापार व निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की उपस्थिति में हस्ताक्षर हुए। दोनों पक्षों के अधिकारियों ने इसे दोनों देशों के बीच व्यापार गतिशीलता को नया आकार देने वाले मील के पत्थर के रूप में वर्णित किया।

सौदे के तहत भारतीय निर्यात को न्यूजीलैंड बाजार में सभी उत्पाद श्रेणियों में शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। इससे वस्त्र, परिधान, चमड़ा वस्तुएं, जूते, इंजीनियरिंग उत्पाद व प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा—ये श्रम पर निर्भर उद्योग हैं जो रोजगार व एमएसएमई विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

अब तक भारतीय सामान जैसे कालीन, सिरेमिक व ऑटो कंपोनेंट्स को न्यूजीलैंड में 10 प्रतिशत तक शुल्क का सामना करना पड़ता था। इन शुल्कों के हटने से निर्यातक वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों पर प्रतिस्पर्धी बढ़त हासिल करेंगे।

समझौता भारत को महत्वपूर्ण कच्चे माल—जैसे लकड़ी, कोकिंग कोल व धातु स्क्रैप—की आसान पहुंच भी सुनिश्चित करता है, जो घरेलू विनिर्माण के लिए जरूरी हैं। इससे इनपुट लागत घटेगी व भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुधरेगी।

दूसरी ओर, भारत ने न्यूजीलैंड से आयात पर अधिकांश शुल्क घटाने या समाप्त करने पर सहमति दी है, जो व्यापार मूल्य का बड़ा हिस्सा कवर करने वाली 70 प्रतिशत से अधिक टैरिफ लाइनों पर लागू होगा। हालांकि, डेयरी, चयनित कृषि उत्पाद, चीनी व कुछ धातुओं जैसे संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों की रक्षा हेतु लगभग 30 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को समझौते से बाहर रखा गया।

भारत न्यूजीलैंड की लगभग 30 प्रतिशत उत्पाद श्रेणियों पर तत्काल शुल्क हटाएगा, जिसमें ऊन, लकड़ी व मटन शामिल हैं, जबकि अन्य वस्तुओं—जैसे पेट्रोलियम उत्पाद, मशीनरी व वनस्पति तेल—पर शुल्क तीन से दस वर्ष की अवधि में चरणबद्ध रूप से समाप्त होंगे।

वाइन, फार्मास्यूटिकल्स व धातु उत्पाद जैसे कई न्यूजीलैंड निर्यातों को शुल्क छूट का लाभ मिलेगा। इसके अलावा, कीवीफ्रूट, सेब व मैनुका शहद जैसे चयनित कृषि वस्तुओं को कोटा आधारित आयात प्रणाली के तहत विनियमित किया जाएगा।

समझौते में निवेश बढ़ाने के प्रावधान भी हैं, जिसमें भारत में 20 अरब डॉलर तक प्रवाह सुगम बनाने का लक्ष्य है। इन प्रतिबद्धताओं में किसी कमी को संबोधित करने हेतु “रीबैलेंसिंग क्लॉज” के रूप में वर्णित अंतर्निहित समीक्षा तंत्र शामिल किया गया है।

दोनों देशों के बीच व्यापार 2024 में लगभग 2.4 अरब डॉलर पहुंचा। एफटीए लागू होने से दोनों सरकारें आने वाले वर्षों में इस आंकड़े को काफी बढ़ाने व आर्थिक सहयोग गहराने को लेकर आशावादी हैं।

By Rajeev Sharma

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