चण्डीगढ 10 फरवरी -हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने 39 वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले के अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि यह मेला केवल कला और संस्कृति का उत्सव नहीं, बल्कि देश के शिल्पकारों, कलाकारों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और अवसर प्रदान करने वाला एक सशक्त मंच है।
उन्होंने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला वर्ष 1987 से निरंतर आयोजित किया जा रहा है और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प तथा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में इस मेले की भव्यता, सुंदरता और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
शिल्पकारों और कलाकारों के लिए वैश्विक मंच
सहकारिता मंत्री ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला शिल्पकारों, कलाकारों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए एक्सपोजर प्लेटफॉर्म है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 44 देशों ने भाग लिया था, जबकि इस वर्ष 50 से अधिक देशों की सहभागिता इस मेले की बढ़ती वैश्विक पहचान को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विकसित भारत के निर्माण में सूरजकुंड शिल्प मेले का भी विशेष योगदान रहेगा, क्योंकि यह मेला स्वदेशी कला, संस्कृति और आत्मनिर्भर भारत की भावना को सशक्त करता है।
उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि वे शिल्पकारों से संवाद करें और उनकी कला को प्रोत्साहन दें। इससे कलाकारों और कारीगरों का मनोबल बढ़ेगा और उनकी आजीविका को मजबूती मिलेगी। कैलाश खेर जैसे कलाकारों की उपस्थिति से मेले की गरिमा और आकर्षण और बढ़ जाता है।
