नई दिल्ली (गुरप्रीत सिंह): भारत के पास अब एक ऐसी परमाणु तकनीक आ गई है, जो देश की ऊर्जा स्वावलंबन और रणनीतिक मजबूती को नई दिशा देगी। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित 500 मेगावाट क्षमता वाला प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) “क्रिटिकलिटी” की अवस्था तक पहुँच चुका है, जिसे भारत के असैन्य परमाणु कार्यक्रम का एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है।
PFBR क्यों है महत्वपूर्ण?
प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण के बिना भी खुद‑से परमाणु विखंडन की श्रृंखला जारी रखकर नाभिकीय ऊर्जा उत्पादन करने लायक स्थिति में पहुँच गया है। इससे भारत कम यूरेनियम संसाधनों के बावजूद दूसरों के ईंधन‑आयात पर निर्भरता कम कर सकेगा और भविष्य में खुद दूसरे देशों के लिए ऊर्जा‑समाधान भी तैयार कर सकता है।
ब्रीडर तकनीक: ईंधन का ‘उत्पादन’
PFBR की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सिर्फ ईंधन खर्च करके ऊर्जा नहीं बनाता, बल्कि साथ‑साथ नया प्लूटोनियम‑आधारित ईंधन भी पैदा करता है। इस प्रणाली में जिस स्तर पर प्लूटोनियम‑239 बनता है, वह आम परमाणु रिएक्टरों की तुलना में अधिक लंबी अवधि तक उपयोग के योग्य ईंधन भंडार बनाने में मदद करेगी।
भाभा के त्रि‑चरणीय कार्यक्रम का दूसरा कदम
डॉ. होमी जहांगीर भाभा द्वारा तैयार किए गए तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम में PFBR दूसरे चरण का केंद्र बन रहा है। इसके पहले चरण में भारत ने भारी जल रिएक्टरों (PHWR) के जरिए यूरेनियम आधारित ऊर्जा उत्पादन स्थापित कर लिया है, जबकि अब फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भाविष्य के लिए ईंधन बनाने और दक्षता बढ़ाने की दिशा में कदम है।
थोरियम रिएक्टर: तीसरा चरण
भारत के परमाणु कार्यक्रम का तीसरा चरण थोरियम‑आधारित रिएक्टरों की तकनीक पर टिका है, जिसके लिए PFBR एक महत्वपूर्ण ब्रिज की भूमिका निभाएगा। देश के पास दुनिया का लगभग एक‑चौथाई थोरियम भंडार है, और इन भंडारों को व्यावहारिक बिजली में बदलने के लिए फास्ट‑ब्रीडर तकनीक की जानकारी जरूरी है।
भारत की ऊर्जा और ‘नेट जीरो 2070’
भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता तक पहुँचने का लक्ष्य रखा है, जो बिना PFBR जैसी तकनीकों के संभव नहीं है। साथ ही देश के 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य में परमाणु ऊर्जा को एक रणनीतिक स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ PFBR निरंतर और निर्भरता वाली बेसलोड बिजली देने में अहम भूमिका निभाएगा।
वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूती
रूस के बाद भारत PFBR के चालू होने से दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा जिसके पास वाणिज्यिक स्तर पर फास्ट‑ब्रीडर तकनीक संचालित है। अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसे देशों ने अपने संबंधित प्रोजेक्ट निरंतरता की कमी के कारण या तो रोक दिए हैं या लंबी देरी से चला रहे हैं, जबकि भारत ने अपनी तकनीक खुद विकसित कर इस क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है।
‘मेड इन इंडिया’ की उपलब्धि
पूरा PFBR प्रोजेक्ट भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) ने स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और निर्मित किया है। इस रिएक्टर में 200 से अधिक भारतीय लघु एवं मझोले उद्योगों का योगदान है, जो देश के आत्मनिर्भर विज्ञान और उद्योग संस्करण का एक जीवंत उदाहरण बनता है।
