‘Kahwa’

कश्मीर के इतिहास, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है ‘काहवा’

कश्मीर के इतिहास, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है ‘काहवा’

चण्डीगढ़, 21 नवंबर -- अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2025 में ब्रह्मसरोवर का पावन तट जहां देश की संस्कृति को प्रदर्शित करने का मुख्य मंच बना हुआ है, वहीं विभिन्न प्रदेशों के खान-पान का भी यहां पर सहजता से मजा लिया जा सकता है। इन खानपान के व्यंजनों के बीच में जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिला के गांव पटन से आए मोहम्मद मगबूल सूफी व उनके साथी अपने साथ कश्मीर का मुख्य पेय कश्मीरी काहवा व ड्राई फ्रूट लेकर महोत्सव में पहुंचे हैं। इस कश्मीरी काहवा की भीनी-भीनी महक की वजह से महोत्सव में आने वाले पर्यटक उनके स्टॉल पर खींचे चले आते हैं।…
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