केंद्र सरकार ने बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):अब बीमा कंपनियों और कई बीचवर्ती संस्थाओं में 100% विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) स्वतः मार्ग (automatic route) के जरिए मान्य हो गया है, जबकि LIC के लिए यह सीमा अभी 20% तक ही रहेगी।

मुख्य बदलाव और व्यापक अर्थ
वित्त मंत्रालय ने विदेशी विनिमय प्रबंधन अधिनियम (FEMA) ढांचे के अंतर्गत “Foreign Exchange Management (Non‑debt Instruments) Rules, 2019” में संशोधन किया है, जिससे बीमा कंपनियों और विभिन्न प्रकार के बीचवर्ती (insurance intermediaries) के लिए निवेश नियम काफी लाइब्रलाइज़ हो गए हैं। अब 100% विदेशी स्वामित्व इन इकाइयों में अनुमत है:

बीमा ब्रोकर

पुनर्बीमा ब्रोकर

बीमा कंसलटेंट

कॉर्पोरेट एजेंट

थर्ड‑पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर

सर्वेयर और लॉस असेसर

बीमा रिपॉजिटरी

नियामक सुरक्षा और शर्तें
सरकार ने नियामक सुरक्षा बनाए रखी है:

स्वतः मार्ग के अंतर्गत सभी विदेशी निवेश भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) की अनुमति और सत्यापन के अधीन होंगे, ताकि क्षेत्र विशेष नियमों (sectoral regulations) का पालन हो सके।

कंपनियों को बीमा अधिनियम, 1938 के प्रावधानों का भी अनुपालन करना अनिवार्य रहेगा।

गवर्नेंस और पारदर्शिता नियम
संशोधित ढांचे में निम्न शर्तें जोड़ी गई हैं:

विदेशी निवेश वाली बीमा इकाइयों में चेयरपर्सन, मैनेजिंग डायरेक्टर या मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) में कम‑से‑कम एक भारतीय निवासी नागरिक होना अनिवार्य है।

कंपनियों को निर्धारित खुलासा मानदंड (disclosure norms) और नियामक दिशा‑निर्देशों का पालन करना होगा।

अधिकांश विदेशी स्वामित्व वाले बीचवर्ती
जिन बीचवर्ती संस्थाओं में अधिकांश स्वामित्व विदेशी होगा, उनके लिए अतिरिक्त शर्तें हैं:

वे अवश्य कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पंजीकृत होंगी।

उन्हें उन्नत तकनीक, प्रबंधनकारी दक्षता और वैश्विक उत्तम प्रक्रियाओं (global best practices) को लाने की लिखित प्रतिबद्धता देनी होगी।

LIC के लिए अलग सीमा
LIC के लिए अलग नियम बना रहा:

LIC में स्वतः मार्ग पर विदेशी निवेश 20% तक ही सीमित रहेगा, जिससे भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की जीवन बीमा इकाई के लिए विशेष सुरक्षा बनी रहे।

इस बदलाव के संभावित प्रभाव
इस कदम से भारत के बीमा क्षेत्र में अधिक पूंजी आकर्षण, बढ़ी प्रतिस्पर्धा और उत्पाद/सेवा नवाचार की उम्मीद है।

साथ ही नियामक अनुपालन और देख‑रेख तंत्र बने रहने से बाजार की स्थिरता और ग्राहक हित की सुरक्षा सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

By Rajeev Sharma

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