नई दिल्ली (गुरप्रीत सिंह): सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देश के सभी नेशनल और स्टेट हाईवेज से आवारा पशुओं को दूर भगाने की PIL पर केंद्र सरकार समेत कई पक्षकारों को नोटिस थमा दिया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने चार हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।
बेंच ने केंद्र, राज्यों, UTs और एनिमल वेलफेयर बोर्ड को नोटिस जारी कर कहा कि कई राज्य 10% गौ-उपकर तो वसूलते हैं, लेकिन सड़कों पर घूमते मवेशियों को कंट्रोल करने का कोई इंतजाम नहीं।
एनएचएआई के वकील ने बताया कि कोर्ट ने पहले स्ट्रे डॉग्स के केस में फैसला रिजर्व रखा था, जिसमें हाईवे पर पशुओं का घुसना भी मुद्दा था। याचिकाकर्ता ‘लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल’ के काउंसल ने कहा कि डॉग्स केस के फैसले से ज्यादातर बातें कवर हो जाएंगी, लेकिन यहां एक्स्ट्रा पॉइंट्स भी हैं। अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद।
PIL में मांग है कि पूरे देश में यूनिफॉर्म गाइडलाइंस बने—हाईवे पर पशु घुसपैठ रोकी जाए, खासकर एक्सीडेंट-प्रोन जोन्स और एक्सप्रेस-वे पर फेंसिंग जरूरी हो। साथ ही, साइंटिफिक गोशालाएं/शेल्टर्स के लिए फंडिंग फिक्स हो और गैरकानूनी तरीके से पशु छोड़ने पर सख्त सजा का प्रावधान बने। हादसों के शिकारों को ‘नो-फॉल्ट’ कंपनसेशन स्कीम भी चाहिए, जहां फॉल्ट साबित न करना पड़े।
