चंडीगढ़, 10 अक्तूबर — हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि प्रदेश सरकार लोगों को सस्ती, बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए जींद जिले के गांव बराड़ खेड़ा में उप-स्वास्थ्य केंद्र खोलने की मंजूरी प्रदान की है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इस केंद्र के शुरू होने से अब स्थानीय लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। यहां पर योग्य स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता और नर्सिंग स्टाफ की तैनाती की जाएगी। जल्द ही नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करके इस स्वास्थ्य केंद्र को आम जनता की सेवा में समर्पित कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह उप-स्वास्थ्य केंद्र केवल बराड़ खेड़ा के ग्रामीणों के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों बुरा डैहर और बहबलपुर के निवासियों के लिए भी वरदान साबित होगा। अब इन गांवों के लोगों को अपने नजदीक ही जांच और इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
आरती सिंह राव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक को उसके घर-द्वार पर ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों, ताकि आपात स्थिति में समय पर उपचार संभव हो सके और लोगों का जीवन सुरक्षित रह सके।
क्रमांक -2025
जंगबीर सिंह
पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में हरियाणा सरकार का एक और कदम
सेवा का अधिकार आयोग को मिलेगी ‘व्यू ओनली’ लॉगिन सुविधा
चंडीगढ़, 10 अक्तूबर-हरियाणा सरकार ने सार्वजनिक सेवा वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग के तहत अधिसूचित सेवाओं की निगरानी के मकसद से ‘व्यू ओनली’ लॉगिन सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया है।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों और निगमों के प्रबंध निदेशकों, मंडल आयुक्तों और उपायुक्तों को एक पत्र लिखकर आयोग को ‘व्यू ओनली’ लॉगिन सुविधा प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
इस सुविधा से आयोग हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 के तहत अधिसूचित तथा विभागीय पोर्टल या अंत्योदय सरल, विभागीय एमआईएस सिस्टम या अन्य डिजिटल इंटरफेस जैसे एकीकृत प्लेटफार्मों के माध्यम से प्रदान की जा सभी सेवाओं की डिजिटल निगरानी करने में सक्षम होगा।
इस पहुँच के माध्यम से आयोग पर्यवेक्षण और निगरानी उद्देश्यों के लिए सेवा वितरण की वास्तविक समय आधार पर समीक्षा कर सकेगा, जिससे सत्यापन, सुनवाई या निरीक्षण के दौरान पारदर्शिता, दक्षता और समय पर निवारण सुनिश्चित होगा। यह व्यवस्था आयोग को निर्धारित समय-सीमा के भीतर विभागीय कार्यों की पुष्टि करने की अनुमति देकर जवाबदेही को भी बढ़ावा देगी।
इससे लिखित रिपोर्टों पर निर्भरता कम होगी और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक वस्तुनिष्ठ एवं आंकड़ा-आधारित बनेगी।
