‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ को साकार करने का सशक्त मंच है सूरजकुंड शिल्प मेला – मुख्यमंत्री

‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ को साकार करने का सशक्त मंच है सूरजकुंड शिल्प मेला – मुख्यमंत्री

चंडीगढ़, 31 जनवरी — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि 39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आत्मनिर्भरता की भावना से जोड़ रहा है। यह मेला ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को सशक्त आधार प्रदान करते हुए स्थानीय शिल्प, कला और कारीगरों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है। इस वर्ष ‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ थीम पर आधारित यह मेला प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन को धरातल पर उतारने का प्रयास है, जिसमें हर कारीगर के हुनर को सम्मान और बाजार दोनों मिलें।

मुख्यमंत्री शनिवार को उप राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा फरीदाबाद में 39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले के उद्घाटन करने उपरांत उपस्थित जन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर, हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री श्री विपुल गोयल, विरासत व पर्यटन मंत्री डॉ. अरविन्द शर्मा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री श्री राजेश नगर, खेल राज्य मंत्री श्री गौरव गौतम, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री मोहन लाल कौशिक भी उपस्थित थे।

श्री नायब सिंह सैनी ने उप-राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन का विशेष रूप से स्वागत करते हुए कहा कि इस मेले में आने से देश-विदेश के शिल्पकारों को नई प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि आज हम कला और शिल्प के उस महाकुंभ के साक्षी बनने जा रहे हैं, जिसकी न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में विशेष पहचान है।

मुख्यमंत्री ने विदेशी मेहमानों का हरियाणा की धरा पर स्वागत करते हुए कहा कि सूरजकुंड शिल्प मेला हमारी प्राचीनता और आधुनिकता का संगम है। आज हम यहां उस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, जो पिछले 38 वर्षों से भारतीय लोक कला और संस्कृति को जीवित रखे हुए है।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर का अर्थ केवल आर्थिक स्वतंत्रता नहीं है। इसमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना, अपनी विरासत को सहेजना और उसे दुनिया के सामने शान से प्रस्तुत करना भी शामिल हैं। सूरजकुंड मेला इसी ‘आत्मनिर्भरता’ का जीता-जागता उदाहरण है। यहां मिट्टी के बर्तनों से लेकर हाथ से बुने हुए कपड़े तक, हर एक वस्तु में भारत की आत्मा बसती है। इस मेले के असली नायक हमारे शिल्पकार हैं।

शिल्पकारों की कला से दिखी ‘अतुल्य भारत’ की झलक

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार भी देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन करने आए हैं। चाहे वह पूर्वोत्तर भारत की बांस की कारीगरी हो, दक्षिण की सिल्क साड़ियां हों, पश्चिम की रंग-बिरंगी कढ़ाई हो या उत्तर भारत की लकड़ी की नक्काशी हो, पूरा ‘अतुल्य भारत’ आज यहां सूरजकुंड में सिमट आया है। उन्होंने कहा कि इस बार सहयोगी और भागीदार राज्य के रूप में उत्तर प्रदेश और मेघालय की विशेष उपस्थिति है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय पटल पर मित्र देश मिस्र की भागीदारी इस मेले को सही मायने में अंतर्राष्ट्रीय बनाती है। यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान ही है, जो देशों के बीच की दूरियों को मिटाता है और दिलों को जोड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। पर्यटन विकास का एक ऐसा इंजन है जो रोजगार के सबसे अधिक अवसर पैदा करता है। सूरजकुंड मेला इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। अगले 15 दिनों तक, यानी 15 फरवरी तक, यहां लाखों पर्यटकों के आने से न केवल शिल्पकारों को बाजार मिलेगा, बल्कि स्थानीय टैक्सी चालकों, होटल व्यवसायियों और छोटे दुकानदारों को भी रोजगार मिलेगा। जब यहां आए पर्यटक कोई वस्तु खरीदते हैं, तो वे केवल एक उत्पाद नहीं खरीदते, बल्कि एक शिल्पकार की कला का सम्मान करते हैं और ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को सिद्ध करते हैं।

By Balwinder Singh

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