चंडीगढ़ (नवल किशोर): सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय 24 से 26 अप्रैल, 2026 तक चंडीगढ़ में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के साथ तीन दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन करेगा। “अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब – विकसित भारत @2047” विषय पर आधारित यह शिविर अमृत काल की परिकल्पना के अनुरूप समावेशी सशक्तिकरण के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस चिंतन शिविर का उद्देश्य सामाजिक न्याय से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना, अंतिम छोर तक लाभ पहुंचाने की व्यवस्था को प्रभावी बनाना तथा वंचित वर्गों के समावेशी एवं सतत सशक्तिकरण के लिए एक कार्यात्मक रोडमैप तैयार करना है।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार करेंगे। इस अवसर पर राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा एवं श्री रामदास अठावले भी उपस्थित रहेंगे। शिविर में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री एवं अधिकारी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक, गुलाब चंद कटारिया, 24 अप्रैल, 2026 को चिंतन शिविर में सहभागिता करेंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं पर आधारित प्रदर्शनी से होगी। इस अवसर पर समावेश पोर्टल, NMBA 2.0 ऐप, सेतु ऐप तथा स्माइल ऐप सहित कई महत्वपूर्ण डिजिटल एवं नीतिगत पहलों का शुभारंभ किया जाएगा। साथ ही डिमेंशिया केयर होम्स के लिए न्यूनतम मानकों तथा भिक्षावृत्ति गृहों के मॉडल दिशानिर्देशों पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान द्वारा विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर भी किए जाएंगे।
तीन दिवसीय इस चिंतन शिविर में विषयगत चर्चाएं एवं समूह सत्र आयोजित किए जाएंगे। 25 अप्रैल को छात्रवृत्ति वितरण एवं शैक्षिक पहुंच, नशा मुक्त भारत अभियान, स्वच्छता कार्य में गरिमा एवं शून्य मृत्यु मिशन, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल तथा दिव्यांग बच्चों के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा। 26 अप्रैल को क्षेत्र आधारित सामाजिक-आर्थिक विकास, वंचित समुदायों की पहचान एवं समावेशन, ऋण सुविधा एवं वित्तीय सशक्तिकरण, तथा दिव्यांगजनों के लिए सुगम्यता एवं प्रमाणन जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
प्रत्येक समूह वर्तमान स्थिति का आकलन कर कमियों की पहचान करेगा तथा श्रेष्ठ प्रथाओं एवं नवाचारों को साझा करेगा। समूह अल्पकालिक, मध्यमकालिक एवं दीर्घकालिक सुझावों के साथ समयबद्ध सिफारिशें प्रस्तुत करेंगे। चर्चाओं को संरचित, साक्ष्य-आधारित एवं परिणामोन्मुख बनाने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया भी तैयार की गई है।
यह चिंतन शिविर राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक साझा मंच के रूप में कार्य करेगा, जहां वे सफल मॉडलों का आदान-प्रदान कर समन्वय को और सुदृढ़ करेंगे। इससे सामाजिक न्याय कार्यक्रमों में अभिसरण, डिजिटल नवाचार एवं बेहतर प्रशासन को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस सुधार एजेंडा तैयार होने की अपेक्षा है।
चर्चाओं के निष्कर्षों के आधार पर सामाजिक न्याय के क्षेत्र में समन्वय, जनभागीदारी एवं प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं को सशक्त बनाने हेतु एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाएगा। शिविर के समापन दिवस पर प्रमुख निष्कर्षों एवं आगामी कार्ययोजना की जानकारी देने के लिए एक प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी।
