नई दिल्ली (राजीव शर्मा): आबकारी नीति मामले में नई विवादास्पद स्थिति बनी है क्योंकि आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेता दिल्ली हाईकोर्ट के एक विशेष जज के समक्ष कार्यवाही से हट गए। पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के इस रुख अपनाने के थोड़ी देर बाद वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने भी यही स्टैंड लिया।
जस्टिस स्वरना कांता शर्मा को लिखित संचार में सिसोदिया ने कहा कि वह अपनी अदालत में मामला लड़ना जारी नहीं रखेंगे। उन्होंने प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर आपत्तियां जताईं, नोट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में न्याय की उम्मीद अब नहीं रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह न तो व्यक्तिगत रूप से पेश होंगे न ही अपना पक्ष रखने हेतु वकील नियुक्त करेंगे।
सिसोदिया की टिप्पणियों में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पर तीखा टिप्पणी शामिल थी, जो राजनीतिक व कानूनी हलकों में प्रतिक्रियाएं भड़काने वाली है। अपने रुख को मजबूत करते हुए उन्होंने इसे “सत्याग्रह” का रूप करार दिया, जो सिद्धांत आधारित शांतिपूर्ण विरोध का संकेत देता है।
एक दिन पूर्व केजरीवाल ने अदालत को पत्र लिखा था जिसमें स्पष्ट किया कि कार्यवाही से हटने का उनका निर्णय विवेक से निर्देशित था। उन्होंने जोर दिया कि उनका कदम न्यायपालिका के प्रति असम्मान नहीं बल्कि वर्तमान सेटअप में जारी रखने के असहजता का प्रतिबिंब है।
ये घटनाक्रम दिल्ली हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद आए हैं, जिसमें केजरीवाल की जस्टिस शर्मा को मामले की सुनवाई से हटाने की याचिका खारिज की गई। दोनों नेताओं के अब भाग न लेने से मामला आगे बढ़ने पर और ध्यान केंद्रित होने की संभावना है।
