वाशिंटन (राजीव शर्मा): संयुक्त राज्य अमेरिका में एक नया विधायी प्रस्ताव कुशल विदेशी पेशेवरों के प्रमुख मार्ग एच-1बी वीजा प्रणाली में व्यापक बदलावों हेतु ध्यान खींच रहा। कांग्रेसमैन एली क्रेन द्वारा पेश बिल कार्यक्रम तक पहुंच को काफी सीमित करने वाला सख्त ढांचा प्रस्तुत करता है।
इसके सबसे उल्लेखनीय प्रावधानों में नए एच-1बी वीजा जारी करने पर तीन वर्ष का प्रस्तावित विराम शामिल है। इसके अलावा, विधेयक वार्षिक सीमा को 25,000 करने व न्यूनतम वेतन 200,000 डॉलर अनिवार्य करने की मांग करता है, जो पात्रता को मुख्य रूप से उच्च-स्तरीय भूमिकाओं तक सीमित कर देगा।
प्रस्ताव को ब्रायन बाबिन व टॉम मैक्लिंटॉक सहित कई रिपब्लिकन सांसदों का समर्थन मिला है, जो तर्क देते हैं कि मौजूदा प्रणाली ने अमेरिकी कामगारों से भर्ती प्रक्रियाओं को दूर कर दिया। वे दावा करते हैं कि घरेलू नौकरी चाहने वालों को प्राथमिकता सुनिश्चित करने हेतु सख्त मानदंड जरूरी हैं। यह दृष्टिकोण डोनाल्ड ट्रंप व उनके सहयोगियों से जुड़े व्यापक अप्रवासन रुख को प्रतिबिंबित करता है।
वीजा संख्याओं को सीमित करने के अलावा, बिल एच-1बी धारकों को वर्तमान में उपलब्ध प्रमुख लाभ समाप्त करने का प्रस्ताव करता है। इनमें आश्रितों को लाने, स्थायी निवास में संक्रमण व ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग कार्यक्रम में भागीदारी शामिल हैं। यदि बिल कानून बने तो संघीय एजेंसियों को गैर-आप्रवासी कामगारों को नियोजित करने से रोका जा सकता।
प्रस्ताव को आकार देने में भूमिका निभाने वाली नीति विश्लेषक रोसेमरी जेनक्स ने इसे वीजा प्रणाली के मूल उद्देश्य को बहाल करने की निर्णायक कदम करार दिया। उनका मानना है कि कार्यक्रम अस्थायी कौशल कमी दूर करने हेतु था, न कि दीर्घकालिक रोजगार चैनल बनने हेतु।
भारतीय पेशेवरों पर प्रभाव बड़ा हो सकता। भारत एच-1बी वीजा प्राप्तकर्ताओं का बड़ा हिस्सा रखता है, विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग व स्वास्थ्य क्षेत्रों में। सख्त पात्रता मानदंडों व कम वीजा उपलब्ध होने से कई आकांक्षी आवेदकों को अमेरिका में अवसर हासिल करना कठिन हो सकता।
बिल का पेश होना कांग्रेस में विवादास्पद चर्चा का आधार बनेगा, क्योंकि व्यापार समूह व उद्योग नेता वैश्विक प्रतिभा तक पहुंच सीमित करने वाले उपायों का विरोध करेंगे। इस बहस का परिणाम कुशल अप्रवासन के भविष्य व अमेरिकी कार्यबल में इसकी भूमिका को आकार देगा।
