जम्मू-कश्मीर (राजीव शर्मा): पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को व्यापक रूप से सख्त कर दिया गया है। संवेदनशील इलाकों, धार्मिक स्थलों और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन मैदान में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक शामिल थे। इस हमले के बाद घाटी में पर्यटन पर गहरा असर पड़ा था और कई स्थानों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था। हालांकि बाद में सुरक्षा समीक्षा के बाद कुछ स्थानों को चरणबद्ध तरीके से दोबारा खोला गया।
हाल ही में कठुआ और सांबा जिलों में संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। वरिष्ठ अधिकारियों ने जमीनी स्तर पर बैठकें कर सुरक्षा रणनीति की समीक्षा की और संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
माता वैष्णो देवी सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। त्रिकुटा पहाड़ियों में स्थित इस पवित्र स्थल के आसपास निगरानी और गश्त को बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा कटरा शहर और आसपास के गांवों में भी सुरक्षा बल लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
सीमा से सटे क्षेत्रों में भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। पुलिस और सीमा सुरक्षा बल के बीच समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, वहीं संभावित घुसपैठ वाले मार्गों पर नियमित गश्त और रात के समय अचानक घेराबंदी अभियान चलाए जा रहे हैं।
पर्यटन गतिविधियों के फिर से बढ़ने के बीच प्रशासन ने सुरक्षा के नए उपाय भी लागू किए हैं। पहलगाम क्षेत्र में पर्यटन से जुड़े सेवा प्रदाताओं के लिए क्यूआर कोड आधारित पहचान प्रणाली शुरू की गई है, जिससे पंजीकृत व्यक्तियों की तुरंत पहचान सुनिश्चित की जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियां किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और पर्यटकों तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
