चंडीगढ़ (नवल किशोर): “नवजात तंत्रिका संबंधी विकार” पर एकल-विषयक कार्यशाला का शुभारंभ पीजीआईएमईआर के एडवांस्ड पीडियाट्रिक सेंटर के ऑडिटोरियम में हुआ। पीजीआईएमईआर के माननीय निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। पीजीआईएमईआर के पूर्व बाल चिकित्सा एवं नवजात विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. ओ. एन. भाकू ने भी उद्घाटन सत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रो . विवेक लाल — जो स्वयं एक प्रतिष्ठित वयस्क तंत्रिका रोग विशेषज्ञ हैं — ने इस चुनौतीपूर्ण विषय पर कार्यशाला आयोजित करने के लिए नवजात इकाई की सराहना की। उन्होंने अपने प्रशिक्षण काल की कई रोचक घटनाएँ साझा करते हुए यह बताया कि ठोस नैदानिक ज्ञान को आधुनिक जाँच विधियों के साथ संयोजित करना कितना महत्वपूर्ण है।
बाल चिकित्सा विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला के अध्यक्ष प्रो. प्रवीण कुमार ने इस प्रकार की केंद्रित कार्यशालाओं के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि उनकी व्यावहारिक प्रकृति के कारण ये कार्यशालाएँ प्रतिनिधियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।
कार्यशाला के आयोजन सचिव प्रो. सौरभ दत्ता ने बताया कि यह 10वीं एकल-विषय कार्यशाला है, और हर बार अगली कार्यशाला का विषय प्रतिनिधि स्वयं चुनते हैं। संयुक्त आयोजन सचिव डॉ. जोगेन्दर कुमार ने धन्यवाद–प्रस्ताव में पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।
वैज्ञानिक कार्यवाही की शुरुआत डॉ. सुप्रीत खुराना के व्याख्यान से हुई, जिसमें उन्होंने नवजात शिशुओं की सामान्य तंत्रिका जाँच को वीडियो के माध्यम से प्रदर्शित किया। त्रिवेंद्रम से आए विशेषज्ञ डॉ. नवीन जैन ने उन नवजात शिशुओं के मूल्यांकन पर व्याख्यान दिया जो मस्तिष्क संबंधी विकारों के साथ प्रस्तुत होते हैं।
प्रो. सौरभ दत्ता ने नवजात मेनिन्जाइटिस के निदान व उपचार में होने वाली त्रुटियों और जटिलताओं पर अपने विचार रखे । प्रो. दीपक चावला ने जन्म के समय एस्फाइक्सिया (ऑक्सीजन की कमी) से होने वाली मस्तिष्क क्षति के निदान, स्टेजिंग तथा चुनिंदा मरीजों में सम्पूर्ण-शरीर शीतन (Whole-body cooling) या मस्तिष्क शीतन की भूमिका पर बात की।
दिल्ली से आए डॉ. नवीन प्रकाश गुप्ता ने समयपूर्व जन्मे शिशुओं में मस्तिष्क के भीतर होने वाले रक्तस्राव तथा मस्तिष्क के श्वेत पदार्थ की क्षति पर व्याख्यान दिया। डॉ. चिराग आहूजा ने परिपक्व तथा अपरिपक्व दोनों प्रकार के नवजात शिशुओं की एमआरआई और सीटी स्कैन की व्याख्या करना सिखाया।
कार्यशाला के पहले दिन का मुख्य आकर्षण तीन व्यावहारिक हैंड्स-ऑन सत्र थे, जिनमें प्रतिनिधियों को क्रमवार शामिल कराया गया। इनमें नवजात शिशुओं में सम्पूर्ण-शरीर शीतन कैसे करना है, सिर का अल्ट्रासाउंड करके तुरंत समस्याओं की पहचान कैसे करनी है, और नवजात EEG (मस्तिष्क विद्युत तरंगें) की व्याख्या कैसे करनी है—इन सबका प्रशिक्षण दिया गया।
इन व्यावहारिक सत्रों के बाद तीन वास्तविक केस परिदृश्यों पर समूह-चर्चाएँ हुईं, जिनमें विभिन्न प्रकार की मस्तिष्क समस्याओं वाले नवजात शिशुओं के मामले शामिल थे। प्रतिनिधियों को विशेषज्ञों से एक-एक कर बातचीत करने का अवसर मिला। इन केस परिदृश्यों में आवश्यकतानुसार नैदानिक विवरण, प्रयोगशाला रिपोर्ट, अल्ट्रासाउंड तथा एमआरआई चित्र भी सम्मिलित थे।
