तेहरान/जेरुसलेम (राजीव शर्मा): अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण संघर्ष में एक अस्थायी रोक लग गई है, मगर दोनों पक्षों से सैन्य गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इससे दो सप्ताह के इस नए समझौते की मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित इस युद्धविराम की शर्त है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करे—जो वैश्विक तेल मार्ग का केंद्र रहा है। वाशिंगटन ने संकेत दिया है कि तेहरान की ओर से इस शर्त को पूरा होने पर ही हमलों पर रोक लगेगी।
समझौते के बावजूद ड्रोन हमलों और छिटपुट गोलीबारी की खबरें कई जगहों से आ रही हैं, जो इस व्यवस्था की कमजोरी को उजागर कर रही हैं। एक माह से ज्यादा चले इस टकराव ने क्षेत्रीय युद्ध की आशंकाओं को बढ़ाया था और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई थी।
युद्धविराम तक पहुंचने वाली कूटनीतिक कोशिशों में कई देश शामिल रहे, जिसमें शहबाज शरीफ ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई। इस्लामाबाद में आगे बातचीत होने वाली है, ताकि यह अस्थायी रोक लंबे समाधान में बदल सके पर इस दौरान जारी हमले अब इस युद्धविराम पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
ईरान ने युद्धविराम के ढांचे के साथ सशर्त सहमति जताई है। अधिकारियों ने कहा कि अगर देश पर हमले बंद हो जाएं, तो सैन्य कार्रवाई रोकी जाएगी और इस दौरान जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग दिया जाएगा। उधर दूसरी ओर इज़राईल का कहना है कि युद्धविराम में लेबनन हिस्सा नहीं है और उन्होंने लेबनन पर युद्धविराम के बाद हमला कर दिया। इसके जवाब में ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की गई.
इसलिए युद्धविराम की टिकाऊपन को लेकर चिंताएं बरकरार हैं। हिंसा की घटनाएं जारी हैं और समझौते की व्याख्या पर मतभेद हैं, जिससे लागू करने के तरीकों पर सवाल उठे हैं।
अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम शुरू लेकिन हमले जारी
