तेहरान/वाशिंगटन (राजीव शर्मा): संयुक्त राज्य अमेरिका व ईरान के बीच चल रहे तनावों के कूटनीतिक समाधान की संभावनाएँ मद्धम पड़ गई हैं, वार्ताओं के प्रगति न करने व दोनों पक्षों के दृढ़ स्थितियों पर कायम रहने के साथ।
संवाद पुनर्जनन के प्रयासों को झटका लगा जब डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी प्रतिनिधियों की इस्लामाबाद यात्रा रद्द कर दी। यह कदम ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के पाकिस्तानी राजधानी यात्रा समाप्त होने के थोड़ा बाद आया बिना किसी ठोस सफलता के।
पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा था, लेकिन कूटनीतिक सूत्रों ने संकेत दिया कि महत्वपूर्ण मतभेद अनसुलझे बने हुए हैं। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे वाशिंगटन द्वारा रखी गईं कठोर स्थितियों को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
यह गतिरोध इज़राइल से जुड़े बढ़े क्षेत्रीय तनावों की पृष्ठभूमि पर आया है, स्थिति को और जटिल बनाते हुए व पश्चिम एशिया में व्यापक अस्थिरता पर चिंताएँ बढ़ाते हुए।
लंबे गतिरोध का वैश्विक बाजारों पर पहले ही दृश्य प्रभाव पड़ा है, तेल कीमतें चढ़ रही हैं व कई अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई की आशंकाएँ पुनरुज्जीवित हो रही हैं। विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि निरंतर अनिश्चितता वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर बोझ बन सकती है यदि समाधान हाथ न आए।
ईरानी अधिकारियों ने हालिया संलग्नताओं को रचनात्मक बताया जबकि औपचारिक वार्ताओं के पुनरारंभ हेतु तत्काल दायरा कम प्रतीत होता है। पर्यवेक्षक कहते हैं कि आने वाले दिन कूटनीतिक चैनलों के पुनः खुलने या तनावों के और बढ़ने का निर्धारण करने में महत्वपूर्ण होंगे।
