चंडीगढ़ (नवल किशोर): पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत “DIY टॉय मेकिंग वर्कशॉप” विषय पर एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम का सफल आयोजन स्नेहालय, मलोया में किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रारंभिक बाल देखभाल को बढ़ावा देना, खेल के माध्यम से सीखने को प्रोत्साहित करना तथा आंगनवाड़ी केंद्रों को सुदृढ़ बनाने हेतु सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती अनुराधा एस. चगती, सचिव, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास, चंडीगढ़ प्रशासन उपस्थित रहीं। इस अवसर पर सुश्री राधिका सिंह, एचसीएस, निदेशक, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास, चंडीगढ़ प्रशासन ने सभी का हार्दिक स्वागत किया। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपरवाइज़रों, अभिभावकों एवं अन्य अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
DIY टॉय मेकिंग वर्कशॉप का आयोजन NGO ‘कच्ची सड़क’ के सहयोग से किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री से स्वदेशी एवं कम लागत वाले खिलौने बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने हस्तनिर्मित खिलौनों का प्रदर्शन एवं प्रस्तुतीकरण करते हुए बच्चों के समग्र विकास हेतु रचनात्मक एवं सतत खेल को बढ़ावा दिया।
डॉ. सुरिति द्वारा अभिभावकों के लिए एक व्याख्यान आयोजित किया गया, जिसमें बच्चों के स्क्रीन टाइम को शून्य तक सीमित करने तथा उन्हें सार्थक, स्क्रीन-फ्री गतिविधियों में संलग्न करने के महत्व पर बल दिया गया। इसके अतिरिक्त, पीजीआईएमईआर के चिकित्सकों द्वारा भी इसी विषय पर जानकारीपूर्ण सत्र आयोजित किया गया, जिससे अभिभावकों में जागरूकता को और सुदृढ़ किया गया। साथ ही, एक कठपुतली शो के माध्यम से भी इस संदेश को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसमें बच्चों में स्क्रीन के उपयोग को कम करने तथा सहभागितापूर्ण एवं खेल-आधारित सीखने को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।
यह कार्यक्रम जागरूकता, नवाचार एवं सामुदायिक सहभागिता के लिए एक प्रभावी मंच सिद्ध हुआ, जिसने पोषण पखवाड़ा के उद्देश्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके साथ-साथ, विभिन्न क्षेत्रों में पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत अनेक गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें मनीमाजरा में मातृ एवं शिशु पोषण विषय पर नारा लेखन प्रतियोगिता, सर्कल-25 में सामुदायिक सहभागिता के साथ पोषण रैलियां तथा रामदरबार में बच्चों के शारीरिक एवं मोटर कौशल विकास हेतु खेल दिवस का आयोजन शामिल रहा।
इसके अतिरिक्त, युवाओं के समूहों की बैठकें, मोटे अनाज (मिलेट्स) के प्रचार-प्रसार, घरों में किचन गार्डन को बढ़ावा देने तथा मिलेट्स एवं संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने हेतु घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाए गए। गर्भवती महिलाओं के लिए पोषण समर्थन, शिशुओं में शीघ्र स्तनपान की शुरुआत, नियमित वृद्धि निगरानी तथा 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए प्री-स्कूल शिक्षा को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया। आंगनवाड़ी केंद्रों को समुदाय में जीवंत शिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास भी किए गए।
यह कार्यक्रम एवं संबंधित गतिविधियां बच्चों के समग्र विकास तथा महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में पोषण पखवाड़ा के उद्देश्यों को सुदृढ़ करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुईं।
