नई दिल्ली/चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह):पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) से हालिया दलबदल को लेकर जारी राजनीतिक टकराव को और तेज करते हुए आरोप लगाया कि संवैधानिक सिद्धांतों को कमजोर किया गया है। यह मुद्दा उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के दौरान उठाया।
मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए मान ने AAP के सात राज्यसभा सदस्यों के पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ जुड़ने के फैसले पर चिंता जताई। उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह से यह बदलाव हुआ, उससे गंभीर कानूनी और संवैधानिक सवाल उठते हैं, खासकर दलबदल विरोधी प्रावधानों को लेकर।
मान के अनुसार, संबंधित सांसदों ने औपचारिक रूप से किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने से पहले खुद को एक अलग इकाई के रूप में प्रस्तुत किया, जिसे उन्होंने तुरंत जांच और संभावित अयोग्यता की मांग के योग्य कदम बताया। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि यह जांच की जाए कि क्या संवैधानिक मानदंडों के तहत उचित प्रक्रिया का पालन किया गया था।
मुख्यमंत्री ने एक राजनीतिक चेतावनी भी दी और कहा कि केंद्र द्वारा पंजाब में इसी तरह की रणनीति दोहराने की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध किया जाएगा। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य के साथ बाहरी दबाव के जरिए छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक कड़े संदेश में मान ने इस घटना को लोकतांत्रिक मूल्यों का क्षरण बताया। उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों पर राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने के लिए औजार के रूप में इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया और इसे विपक्ष शासित सरकारों को कमजोर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया।
यह विवाद 24 अप्रैल को हुए एक बड़े घटनाक्रम से जुड़ा है, जब राघव चड्ढा, संदीप पाठक, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल सहित कई प्रमुख AAP नेताओं ने पार्टी छोड़ दी थी। इस समूह ने इसके पीछे वैचारिक मतभेदों और पार्टी की दिशा से असंतोष को कारण बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विकास AAP के लिए एक बड़ा झटका है, खासकर पंजाब में, जहां पार्टी फिलहाल सत्ता में है। दलबदल करने वाले अधिकांश सांसद राज्य से जुड़े हुए हैं, इसलिए इसका भविष्य के चुनावों से पहले प्रतीकात्मक और रणनीतिक दोनों तरह का असर पड़ने की संभावना है।
जहां BJP ने इस कदम को एक वैध राजनीतिक पुनर्संरेखण बताया है, वहीं AAP नेता इसे लोकतांत्रिक नैतिकता के लिए चुनौती के रूप में पेश कर रहे हैं। यह स्थिति आने वाले हफ्तों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है, खासकर अगर कानूनी कार्रवाई या संसदीय हस्तक्षेप होता है।
