चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह): पंजाब सरकार स्कूल छात्रों के बीच सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने वाली नीति पर काम कर रही है, क्योंकि तेजी से डिजिटल हो रही दुनिया में युवा शिक्षार्थियों पर इसके प्रभाव की चिंताएं बढ़ रही हैं।
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि बच्चों पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के प्रभाव की जांच व उपयुक्त दिशानिर्देश सुझाने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। शैक्षणिक विशेषज्ञों व सरकारी अधिकारियों से बनी यह समिति विभिन्न क्षेत्रों के रुझानों की समीक्षा कर रही है ताकि असीमित पहुंच के लाभ व जोखिमों को समझा जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि अध्ययन सोशल मीडिया प्रतिबंध वाले व न होने वाले क्षेत्रों के छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन व व्यवहार पैटर्न की तुलना करेगा। इन निष्कर्षों के आधार पर सरकार बच्चों की सुरक्षा करते हुए आधुनिक शिक्षण उपकरणों से जुड़े रहने की संतुलित रणनीति तैयार करेगी।
मंत्री ने नोट किया कि नियम अवसरवर्षीय व्यक्तियों को सोशल मीडिया खाते खोलने से रोकते हैं, लेकिन प्रवर्तन चुनौती बना हुआ है क्योंकि कई छात्र विभिन्न तरीकों से प्लेटफॉर्म तक पहुंच जाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि जागरूकता व नियमन साथ-साथ चलना चाहिए ताकि सुरक्षित डिजिटल संलग्नता सुनिश्चित हो।
साथ ही, पंजाब सक्रिय रूप से अपनी शिक्षा प्रणाली में उन्नत तकनीकों को एकीकृत कर रहा है। मिडिल व सीनियर कक्षाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को विषय के रूप में कोडिंग के साथ शुरू किया गया है, ताकि छात्र तकनीक संचालित क्षेत्रों के भविष्य के करियर के लिए तैयार हों।
सरकार बिजनेस ब्लास्टर्स कार्यक्रम जैसे पहलों से नवाचार को बढ़ावा दे रही है, जिसमें छात्रों को वित्तीय व मेंटरिंग समर्थन से उद्यमी विचार विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यह पहल अब उच्च शिक्षा संस्थानों तक विस्तार पा चुकी है, जिसे शैक्षणिक मूल्यांकन से जोड़ा गया है।
इसके अतिरिक्त, बुनियादी ढांचे व शिक्षण मानकों को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। राज्य भर के स्कूलों में इंटरनेट सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, और छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन दिया जा रहा है। शिक्षक भारत व विदेश में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों से गुजर रहे हैं ताकि कक्षा वितरण बेहतर हो।
बैंस ने दोहराया कि तकनीकी प्रगति को जिम्मेदार उपयोग के साथ जोड़ने वाला शिक्षण वातावरण बनाने का लक्ष्य है, ताकि छात्र भविष्य के लिए तैयार हों बिना ऑनलाइन अनावश्यक जोखिमों के।
