ओटावा (राजीव शर्मा): कनाडा के शीर्ष सैन्य कमांडर जेनी कैरिग्नान ने आगाह किया कि देश को बड़े पैमाने के पारंपरिक युद्धों की संभावना के लिए तैयार रहना होगा। यह वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के तेज बदलाव के बीच रक्षा प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव दर्शाता है।
खतरों के बदलते स्वरूप पर बोलते हुए जनरल कैरिग्नान ने कहा कि दुनिया अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुकी है। कनाडा को सैन्य क्षमताओं और तैयारियों पर पुनर्विचार करना होगा। उन्होंने जोर दिया कि सेनाओं को उच्च तीव्रता वाले पारंपरिक संघर्षों का सामना करने लायक ढाला जाए—हाल के दशकों की उग्रवाद विरोधी कार्रवाइयों से अलग हैं।
इन चुनौतियों से निपटने को रक्षा संरचना की विस्तार योजना है। इसमें पूर्णकालिक सैनिकों की संख्या बढ़ाना, रिजर्व फोर्स मजबूत करना और आपातकाल में सक्रिय 3 लाख प्रशिक्षित नागरिकों का ‘रणनीतिक रिजर्व’ बनाना शामिल है।
रूस व उत्तर कोरिया जैसे देशों की बढ़ती ताकत, खासकर लंबी दूरी मिसाइल प्रौद्योगिकी जो उत्तरी अमेरिका को निशाना बना सकती है, जो कि चिंता का विषय है। आर्कटिक क्षेत्र में उभरती भू-राजनीतिक होड़—जहां महाशक्तियां प्रभाव के लिए संघर्षरत—कनाडाई रक्षा योजनाकारों का फोकस है।
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी सरकार अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से गहरा सहयोग तलाश रही है। विकल्पों में यूके नेतृत्व वाली जॉइंट एक्सपेडिशनरी फोर्स (जेेएफ) में शामिल होना, जो बाल्टिक सागर, उत्तर अटलांटिक व आर्कटिक में तेज प्रतिक्रिया के लिए बनी है।
जनरल कैरिग्नान ने हाल में लंदन में नॉर्डिक, बाल्टिक देशों व नीदरलैंड्स सहित गठबंधन सदस्यों से बात की। उन्होंने खुफिया साझा, संयुक्त अभ्यास और समन्वित कार्रवाइयों के अवसर के तहत इसे प्रोत्साहनजनक बताया।
