इस्लामाबाद (राजीव शर्मा): ईरान ने पाकिस्तान में चली उच्च दांव वाली वार्ताओं के असफल होने का पूरा दोष अमेरिका पर डाला है। तेहरान ने वाशिंगटन को ‘अनुचित’ और ‘गैरकानूनी’ मांगें करने का आरोप लगाया, जिसने सफलता की राह रोकी।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि लगभग 21 घंटे चली चर्चाएं अमेरिकी पक्ष की ‘अवास्तविक अपेक्षाओं’ से समझौते पर नहीं पहुंच सकीं।
बकाई ने जोर दिया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा और साझा ढांचे की तलाश में गहन बहस की। लेकिन उन्होंने कहा कि अमेरिकी रुख ने सार्थक उन्नति रोकी, जबकि तेहरान ने कई प्रस्ताव रखे हैं।
उन्होंने दोहराया कि मतभेद बाकी हैं, लेकिन कूटनीति खत्म नहीं हुई है। “भविष्य की सफलता दूसरे पक्ष की गंभीरता और अतिरिक्त मांगें छोड़ने पर निर्भर,” बकाई बोले। ईरान कूटनीतिक रास्तों से हित सुरक्षित रखेगा।
पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली वार्ता में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध हटाना, होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विवादास्पद मुद्दे शामिल हैं। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि कुछ सहमति बनी, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर असहमति ने गतिरोध पैदा किया है।
तेहरान के नजरिए से बातें पुराने अविश्वास के माहौल में चलीं। अधिकारियों ने अमेरिका के बीते कदमों और ‘टूटे वादों’ को जटिलता का कारण बताया।
इधर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वाशिंगटन ने ‘सर्वोत्तम और अंतिम’ प्रस्ताव रखा। असफलता ईरान के मुख्य मुद्दों, खासकर परमाणु कार्यक्रम पर रुख न बदलने का परिणाम है।
सौदे न होने पर ईरानी पक्ष ने कहा कि एक दौर से तत्काल सफलता की उम्मीद नहीं है। अगर हालात बदलें तो आगे जुड़ाव संभव होगा।
अस्पष्ट नतीजे ने क्षेत्र को स्थिर करने की कोशिशों में अनिश्चितता बढ़ाई, खासकर ऊर्जा मार्गों और व्यापक संघर्ष से जुड़े नाजुक युद्धविराम पर है।
