चंडीगढ़ (नवल किशोर): आज उपायुक्त, चंडीगढ़ की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश के सभी निजी शैक्षणिक संस्थानों में स्टूडेंट्स के सुरक्षित परिवहन हेतु नीति (STRAPS) के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान यह पाया गया कि कई स्कूलों ने संशोधित भवन योजना (Revised Building Plan – RBP) की स्वीकृति प्राप्त किए बिना अपने परिसर के लेआउट में बदलाव किए हैं। कई मामलों में स्वीकृत भवन योजनाओं के अनुसार निर्धारित पार्किंग स्थलों को कक्षाओं, खेल मैदानों, कोर्ट अथवा अन्य उपयोगों में परिवर्तित कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप स्कूल परिसरों में पार्किंग की कमी हो गई है, जिससे छात्रों के सुरक्षित चढ़ने और उतरने (बोर्डिंग एवं डी-बोर्डिंग) की व्यवस्था परिसर के भीतर करना कठिन हो रहा है।
फलस्वरूप, स्कूलों के बाहर यातायात जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है, क्योंकि अभिभावकों को सार्वजनिक सड़कों पर ही बच्चों को छोड़ना और लेना पड़ रहा है। जबकि यूटी प्रशासन की STRAPS नीति के अनुसार निम्नलिखित प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाना अनिवार्य है:
- पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ: जिन स्कूलों में आंतरिक पार्किंग उपलब्ध है, वे छात्रों को स्कूल परिसर के भीतर ही चढ़ाने और उतारने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। जहां यह संभव न हो, वहां परिसर के बाहर एक निर्धारित और चिन्हित क्षेत्र बोर्डिंग एवं डी-बोर्डिंग के लिए बनाया जाए।
- यातायात प्रबंधन: स्कूलों को अपने स्तर पर स्टाफ/मैनपावर तैनात करनी होगी, जो स्कूल के खुलने और बंद होने के समय परिसर के आसपास यातायात को नियंत्रित करे तथा एक-तरफा यातायात (वन-वे) सुनिश्चित करे, ताकि छात्रों को सड़क पार न करनी पड़े।
इस संबंध में, एस्टेट ऑफिस के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्वीकृत संशोधित भवन योजनाओं का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करें। स्कूलों को निर्देशित किया जाएगा कि वे पार्किंग हेतु निर्धारित क्षेत्रों में किए गए सभी अतिक्रमण और उल्लंघनों को एक माह के भीतर हटाएं, अन्यथा डिफॉल्टरों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, स्कूल शिक्षा निदेशक को निर्देशित किया गया है कि वे सभी स्कूलों को निर्देश जारी करें कि जहां भी पार्किंग सुविधा उपलब्ध है, वहां छात्रों की बोर्डिंग और डी-बोर्डिंग केवल स्कूल परिसर के भीतर ही सुनिश्चित की जाए।
यह भी बताया गया कि कई शैक्षणिक संस्थानों/स्कूलों की लीज शर्तों के अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 15% सीटें निःशुल्क उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इस संबंध में, एस्टेट ऑफिस के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे सभी लीजधारी स्कूलों में इस प्रावधान के अनुपालन की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
