हरियाणा लिख रहा है समृद्धि की नई परिभाषा, 60 वर्षों की विकास यात्रा ने हरियाणा को खुशहाली तक पहुंचाया

चंडीगढ़, 2 मार्च – मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा हरियाणा विधानसभा में प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का बजट अनेक मायनों में ऐतिहासिक और दूरदर्शी दस्तावेज सिद्ध हुआ है। यह बजट केवल आय-व्यय का विवरण नहीं, बल्कि 60 वर्षों की विकास यात्रा का जीवंत प्रमाण है, जो दर्शाता है कि हरियाणा ने सीमित संसाधनों से शुरूआत कर आज सम्पन्नता और खुशहाली की नई परिभाषा गढ़ी है।

वर्ष 1966 में मात्र 154 करोड़ रुपये के पहले बजट से अपनी वित्तीय यात्रा प्रारंभ करने वाला हरियाणा आज वर्ष 2026-27 के लिए 2,23,658.17 करोड़ रुपये के विशाल बजट तक पहुंच चुका है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि दूरदर्शी नीतियों, सशक्त नेतृत्व और प्रदेशवासियों के अथक परिश्रम का परिणाम है।

प्रस्तुत बजट इस बात को प्रतिबिंबित करता है कि प्रदेश में इन्फ्रास्ट्रक्चर का तीव्र विकास हुआ है और अब हरियाणा इनोवेशन, आधुनिक आधारभूत ढांचे और समावेशी विकास (इन्क्लुसिव ग्रोथ) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का स्पष्ट लक्ष्य संतुलित और सर्वस्पर्शी विकास है—चाहे शहर हो या गांव, गरीब हो या अमीर, हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना उनकी प्राथमिकता है।

हरियाणा देश के कुल क्षेत्रफल का मात्र 1.34 प्रतिशत और जनसंख्या का 2.09 प्रतिशत प्रतिनिधित्व रखता है, फिर भी देश की जीडीपी में प्रदेश का योगदान 3.6 प्रतिशत है, जो इस वर्ष 3.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह उपलब्धि राज्य की सुदृढ़ आर्थिक संरचना और उद्योग, कृषि तथा सेवा क्षेत्रों में निरंतर प्रगति का प्रमाण है।

प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय बड़े राज्यों में सर्वाधिक, लगभग 3,95,618 रुपये तक पहुंच चुकी है, जबकि वर्ष 1966 में यह केवल 608 रुपये थी। उस समय प्रदेश का निर्यात मात्र 4 करोड़ 50 लाख रुपये था, जो आज बढ़कर 2 लाख 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। यह परिवर्तन हरियाणा की औद्योगिक क्षमता और वैश्विक बाजार में उसकी मजबूत उपस्थिति को दर्शाता है।

हरित क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाने वाले हरियाणा ने अपने कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के प्रति बजट के माध्यम से कृतज्ञता प्रकट की है। उनकी मेहनत और नवाचार के कारण प्रदेश आज भी खाद्यान्न उत्पादन में अग्रणी राज्यों में शामिल है। वर्ष 1966 में जहां खाद्यान्न उत्पादन लगभग 26 लाख टन था, वहीं आज यह बढ़कर 208.8 लाख टन तक पहुंच गया है।

पशुपालन के क्षेत्र में भी हरियाणा की विशिष्ट पहचान है। अपनी मुर्राह भैंसों और साहीवाल गायों के लिए प्रसिद्ध यह प्रदेश दूध उत्पादन में अग्रणी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ आधार प्रदान करता है।

वर्ष 1966 में जहां सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं सीमित थीं, वहीं आज हर गांव पक्की सड़कों से जुड़ा है। गांवों और ढाणियों तक बिजली की रोशनी पहुंच चुकी है तथा प्रत्येक घर में नल से जल उपलब्ध कराने की दिशा में व्यापक कार्य हुआ है। सिंचाई के लिए पर्याप्त नहरों और आधुनिक साधनों की उपलब्धता ने कृषि को नई गति दी है।

वर्ष 2026-27 का यह बजट हरियाणा की 60 वर्षों की उपलब्धियों का संकल्प-पत्र है, जो प्रदेश को आत्मनिर्भर, समृद्ध और संतुलित विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करता है।

By Balwinder Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *