चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह): पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत अमृतपाल सिंह की निवारक हिरासत में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया, उनके आदेश के खिलाफ याचिका खारिज करते हुए राज्य के सुरक्षा चिंताओं के रुख का समर्थन किया।
अपना फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस शील नागू की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि हिरासत आदेश का न्यायिक पुनरीक्षण आवश्यक नहीं है, जिससे खडूर साहिब सांसद द्वारा उठाई गई कानूनी चुनौती प्रभावी रूप से समाप्त हो गई।
सिंह ने अप्रैल 2023 से चली आ रही उनकी निरंतर हिरासत को विधिक आधारहीन बताते हुए अदालत का रुख किया, दावा किया कि यह उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि उनकी हिरासत के बार-बार विस्तार को उचित ठहराने के लिए कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है और यह कार्रवाई व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए बने सुरक्षा प्रावधानों का उल्लंघन करती है।
याचिका में जोर दिया गया कि हिरासत से पहले उनकी सार्वजनिक गतिविधियां सामाजिक सुधार पर केंद्रित थीं, जिसमें नशा मुक्ति अभियान और युवाओं को जोड़ने के प्रयास शामिल थे। इसमें कहा गया कि उनके भाषण सांस्कृतिक और संवैधानिक विषयों पर आधारित थे, हिंसा को बढ़ावा देने के किसी भी आरोप को खारिज किया।
हिरासत के आधारों पर सवाल उठाते हुए सिंह ने अधिकारियों द्वारा उद्धृत हालिया FIR का हवाला दिया, दावा किया कि मूल रूप से उनका नाम शामिल नहीं था और मामले से उन्हें जोड़ने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि चल रही आपराधिक कार्यवाहियां निवारक हिरासत कानूनों को लागू करने का सामान्य कारण नहीं बन सकतीं।
याचिका का विरोध करते हुए राज्य ने तर्क दिया कि खतरे की गंभीर धारणा के कारण हिरासत आवश्यक है। कानूनी प्रतिनिधियों ने खुफिया इनपुट का हवाला दिया जिसमें संदिग्ध “हिट लिस्ट” का उल्लेख था और याचिकाकर्ता व अपराधी व उग्रवादी नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों के बीच कथित संबंध बताए।
विचार-विमर्श की समीक्षा के बाद अदालत ने राज्य के रुख को स्वीकार किया और निष्कर्ष निकाला कि हिरासत आदेश विधिक रूप से टिकाऊ है। इस फैसले के साथ सिंह की NSA के तहत निरंतर हिरासत बरकरार रहेगी।
