सड़क सुरक्षा पर सख्ती: सांसद मनीष तिवारी की अध्यक्षता में जिला परिषद की पहली बैठक, ब्लैक स्पॉट्स और ‘गोल्डन ऑवर’ पर खास फोकस

चंडीगढ़ (नवल किशोर): जिला सड़क सुरक्षा परिषद की पहली बैठक माननीय सांसद श्री मनीष तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें जिले में सड़क सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करने तथा सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु दर को कम करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

उपायुक्त श्री निशांत कुमार यादव ने माननीय सांसद एवं परिषद के सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए सड़क सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के प्रभावी समाधान हेतु प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस, इंजीनियरिंग विभागों, स्वास्थ्य सेवाओं तथा नागरिक समाज के बीच समन्वित एवं बहु-हितधारक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।

ट्रैफिक पुलिस द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें वर्तमान सड़क सुरक्षा परिदृश्य, हालिया दुर्घटना रुझान, प्रवर्तन उपायों तथा तत्काल ध्यान देने योग्य कमियों को रेखांकित किया गया। दुर्घटना-प्रवण “ब्लैक स्पॉट्स” की पहचान पर विशेष जोर दिया गया।

इन उच्च जोखिम वाले स्थलों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए माननीय सांसद ने संबंधित विभागों को समयबद्ध एवं परिणामोन्मुखी हस्तक्षेप करने के निर्देश दिए, जिनमें बेहतर संकेतक (साइनेज), सड़क इंजीनियरिंग में सुधार, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था तथा सख्त प्रवर्तन शामिल हैं।

बुनियादी ढांचा विकास की समीक्षा करते हुए माननीय सांसद ने प्रस्तावित फ्लाईओवर परियोजना की प्रगति के बारे में जानकारी ली। यातायात जाम कम करने और सड़क सुरक्षा बढ़ाने में इसकी महत्ता को रेखांकित करते हुए उन्होंने परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने तथा नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

माननीय सांसद ने सड़क दुर्घटनाओं के बाद के महत्वपूर्ण “गोल्डन ऑवर” पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि इस अवधि में समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ करने, एम्बुलेंस उपलब्धता बढ़ाने, पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने तथा अस्पतालों की ट्रॉमा देखभाल क्षमता को मजबूत करने पर बल दिया।

इसके अतिरिक्त, माननीय सांसद ने सड़क सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से यह संदेश व्यापक रूप से प्रसारित करने के निर्देश दिए कि दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने वाले “गुड सेमेरिटन” (Good Samaritans) को पुलिस या अस्पताल द्वारा किसी प्रकार की परेशानी नहीं दी जाएगी, क्योंकि उनके लिए कानूनी सुरक्षा पहले से उपलब्ध है। इस संदेश को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया के साथ-साथ सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रचारित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी रही तथा प्रवर्तन, बुनियादी ढांचे और जन-जागरूकता को सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए गए। बैठक का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि सभी निर्णयों को मिशन मोड में लागू किया जाएगा, ताकि जिले में सड़कें सुरक्षित बनें और दुर्घटनाओं एवं मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके।

By Gurpreet Singh

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